Tuesday, February 7, 2017

प्यास

प्यास है एक आस की ,
एक छोटी सी जज्बात की ,
तेरे - मेरे , टूटे दिल की,
जुड़ने की एहसास की।

प्यास है  एक आग की ,
जिस्म की अधूरे तृप्त की ,
बिखरे हुए बेइंतिहा  लम्हो  को,
खयालो की किताब में समेटने की।

प्यास है , मेरे बाजुओ को  ,
अलिगन कर,
बिसरे यादो की अनुभूति की।

प्यास है एक जज्बे  की ,
एक रूहानी जज्बात की।
खोये अपने सपनो को ,
यथार्थ की धरातल की ।

प्यास है , एक रूठे को मानाने की,
बिछड़े अपने से मिलने की।

अहसासों की अनगिनत प्यास में ,
अविरल है मेरी तलाश,
सिर्फ और सिर्फ ,
एक मुकम्मल जिंदगी जीने की।

पिकाचु

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