Thursday, November 10, 2016

एक इंकलाब , सैलाब , और एक महात्मा


आधा सच , आधा झूठ  ,
आधा इकरार , आधा करार ,
यही तो सच है ,मेरे तेरे ,
सबकी रंग बदलती दुनिया की।


आधा प्यार  , आधा धोखा ,
आधा वफ़ा , आधा जफ़ा ,
आधा दूध  , आधा पानी ,
आधा शराब , खाली बोतल ,
पूरा सच ,
नाचती दुनिया,   पीछे इनके।


सत्य वचन , कही न सुना ,
झूठा वचन , हर से सुना।
निंदित वचन , स्तुति वंदन ,
वर्तमान युग , हिंसा का तांडव ,
मिथ्या माया ,सर्वस्व छाया।


विश्व में आतंक , वैमनस्य सर्वत्र ,
वैचारिक मतवेद ,थम गया वैश्विक चाल ,
राजनीती की चाल , आम आदमी बेहाल।
कटुता , कुटिलता , काम की अग्न ,
दफ़न हो रही  इंसानियत।
इन्तेजार बस एक  इंकलाब , सैलाब , और एक महात्मा का।


पिकाचु



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